इंस्टाग्राम की लत का टेस्ट: दस सवाल (ख़ुद को परखने के लिए, डायग्नोसिस नहीं)
यह ख़ुद को परखने की एक सूची है, निदान नहीं। दस सवालों से कोई नहीं बता सकता कि आपको किसी चीज़ की लत है या नहीं। यह बस ईमानदारी से दिखाती है कि इंस्टाग्राम आपके दिन में कहाँ बैठता है, ताकि आप तय कर सकें कि कुछ बदलना है या नहीं।
सोशल मीडिया के समस्याग्रस्त इस्तेमाल पर शोध करने वाले अक्सर ऐसी बातें पूछते हैं: दिमाग़ में उसी का चलते रहना, समय के साथ ज़्यादा इस्तेमाल, बुरे मूड से भागने के लिए इस्तेमाल, कम करने की नाकाम कोशिशें, न मिलने पर बेचैनी और बाक़ी ज़िंदगी को नुक़सान। एक जाना-माना शोध पैमाना, Bergen Facebook Addiction Scale, छह बिंदुओं पर ऐसे ही बना है। नीचे के सवाल हमने अपने शब्दों में लिखे हैं और वे वह पैमाना नहीं हैं।
दस सवाल
पिछले दो हफ़्तों को सोचकर हाँ या ना में जवाब दें।
- मैं बिना तय किए इंस्टाग्राम खोल देता या देती हूँ। मेरा अँगूठा मुझसे पहले पहुँच जाता है।
- उठते ही, कुछ और करने से पहले, कुछ ही मिनटों में उसे देख लेता या लेती हूँ।
- “बस पाँच मिनट” कहकर इस हफ़्ते एक से ज़्यादा बार बहुत देर तक रुका या रुकी हूँ।
- ऊब, अकेलापन या तनाव होने पर उसे खोलता या खोलती हूँ, और राहत बस एक मिनट की होती है।
- मैंने कम करने की कोशिश की, पर टिक नहीं पाया या पाई।
- उसे न देख पाऊँ तो बेचैनी या हल्की घबराहट होती है।
- उसकी वजह से एक से ज़्यादा बार देर से सोया या सोई, काम पर देर से पहुँचा या पहुँची, या निकलने में देर हुई।
- उसे देखने में लगे होने की वजह से किसी की बात छूट गई।
- स्क्रॉल के बाद पहले से बुरा लगता है, फिर भी स्क्रॉल करता या करती हूँ।
- मैंने अपना इस्तेमाल दूसरों से छिपाया है या कम बताया है।
जवाबों का क्या मतलब हो सकता है
- 0 से 2 हाँ: शायद आप इंस्टाग्राम जानबूझकर उठाते हैं। पहले सवाल पर नज़र रखें।
- 3 से 6 हाँ: एक आदत बन चुकी है। रुकावट जोड़ना और एक हफ़्ता कुल समय देखना काम आएगा।
- 7 से 10 हाँ: यह आपके दिन में काफ़ी जगह ले रहा है। यह आप पर फ़ैसला नहीं है, बदलाव का संकेत है, और बदलते समय अपने साथ नरमी रखें। मन या नींद पर असर हो तो डॉक्टर या काउंसलर से बात करें।
ये दायरे इस पेज के लिए हमने बनाए हैं, ये चिकित्सा की कट-ऑफ़ नहीं हैं। सवाल 7 या 8 पर एक “हाँ” भी, यानी नींद या रिश्तों को नुक़सान, गिनती से ज़्यादा मायने रखता है।
शोध क्या कहता है और क्या नहीं
हर चीज़ का दोष सोशल मीडिया पर डालना आसान है, पर सबूत मिले-जुले हैं। किशोरों पर Orben और Przybylski के बड़े विश्लेषण में तकनीक के इस्तेमाल और भलाई का संबंध छोटा निकला। 143 कॉलेज छात्रों के प्रयोग में Hunt और साथियों ने पाया कि फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट को तीन हफ़्ते तक प्रति प्लेटफ़ॉर्म रोज़ दस मिनट तक सीमित करने वाले समूह में अकेलापन और उदासी सामान्य इस्तेमाल करने वालों से कम रही। दोनों बातों का सार सीधा है: कितना, और किसकी जगह पर, यह घंटों से ज़्यादा मायने रखता है।
नतीजे का क्या करें
एक चीज़ चुनें, पाँच नहीं।
- सवाल 1 या 2 (अपने आप खुलना): इंस्टाग्राम को होम स्क्रीन से हटाएँ और खुलने से पहले छोटा ठहराव जोड़ें। 10 सेकंड का ठहराव देखें।
- सवाल 3 या 4 (समय का खिसकना, मूड में खोलना): रोज़ का बजट तय करें और लिखें कि मूड ख़राब होने पर क्या करेंगे: टहलना, किसी को मैसेज, एक गिलास पानी।
- सवाल 7 (नींद): सात रात फ़ोन कमरे के बाहर चार्ज करें।
- सवाल 8 (लोग): खाने और घर वालों के साथ पहले घंटे में फ़ोन दूर रखें।
- सवाल 9 (बुरा लगना): जिन अकाउंट से मन भारी होता है उन्हें अनफ़ॉलो करें। फ़ीड आपकी है।
दो हफ़्ते बाद सवाल फिर करें। दूसरी बार में आया बदलाव ही काम का संकेत है।
कब किसी से बात करें
अगर इस्तेमाल क़ाबू से बाहर लगे, और साथ में उदासी, घबराहट या नींद की ऐसी दिक़्क़त हो जो ठीक न हो रही हो, तो डॉक्टर या काउंसलर वह मदद दे सकते हैं जो कोई ऐप नहीं दे सकता। Thumbpause एक सेल्फ-हेल्प टूल है, चिकित्सा सेवा नहीं।
Thumbpause कैसे मदद करता है
Thumbpause पहले दो सवालों पर काम करता है: अपने आप खुलना और समय का खिसकना। Android पर यह इंस्टाग्राम से पहले दस सेकंड का ठहराव रखता है, पूछता है कि आप किसलिए आए हैं, और 2, 5 या 10 मिनट जारी रखने या बंद करने देता है। यह न जाँचता है, न निदान करता है। अभी स्टोर पर नहीं है, होम पेज पर वेटलिस्ट है। पहले अपने घंटे देखना चाहें तो कैलकुलेटर में बस एक संख्या डालनी है।
सवाल
क्या यह असली लत की जाँच है?
नहीं। यह सोचने का औज़ार है, चिकित्सा या मनोवैज्ञानिक जाँच नहीं, और इससे कोई निदान नहीं हो सकता। शोध में इस्तेमाल होने वाले पैमाने, जैसे Bergen स्केल, भी शोध के औज़ार हैं, निदान नहीं।
कितने अंक का मतलब है कि दिक़्क़त है?
कोई अंक यह नहीं बताता। असली संकेत यह है कि इंस्टाग्राम आपकी नींद, काम, पढ़ाई या सामने बैठे लोगों के बीच आ रहा है या नहीं।
अगर ज़्यादा 'हाँ' आएँ तो?
नीचे की सूची से एक बदलाव चुनें और एक हफ़्ता आज़माएँ। अगर इस्तेमाल क़ाबू से बाहर लगे और मन, नींद या रोज़मर्रा पर असर पड़े, तो डॉक्टर या काउंसलर से मिलें।
स्रोत
- Andreassen et al., Development of a Facebook Addiction Scale, Psychological Reports
- Hunt et al., No More FOMO: Limiting Social Media Decreases Loneliness and Depression, Journal of Social and Clinical Psychology
- Orben and Przybylski, The association between adolescent well-being and digital technology use, Nature Human Behaviour
आपके जीवन का कितना हिस्सा स्क्रीन पर जाता है?
कैलकुलेटर रोज़ के घंटों को साल के दिनों में बदलता है। यह आपके ब्राउज़र में चलता है और कुछ भी भेजता नहीं।
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